एयरलाइंस की तर्ज पर रेलवे भी बदतमीजी करने वाले यात्रियों पर लगा सकता है प्रतिबंध, बोर्ड ने मॉडल बनाने का आदेश दिया


नई दिल्ली. बदतमीजी करने वाले यात्रियों को एयरलाइंस की तर्ज पर अब ट्रेनों में भी प्रतिबंधित किए जाने की तैयारी की जा रही है। ट्रेन में तैनात कर्मचारी या सह यात्री की शिकायत पर यह कार्रवाई की जा सकती है। रेलवे बोर्ड ने इसका मॉडल तैयार करने का आदेश दे दिया है। इसके अलावा रेलवे उन यात्रियों के सफर पर भी रोक लगाने की तैयारी में है, जिनकी यात्रा एयरलाइंस द्वारा भी प्रतिबंधित हो। रेलवे सभी एयरलाइंस से ऐसे यात्रियों की सूची लेगा और फिर इसे अपने सिस्टम में डाल देगा, ताकि कुछ महीनों के लिए उनकी टिकट बुकिंग पर रोक लगाई जा सके। हालांकि, खराब बर्ताव करने वाले यात्रियों पर यह प्रतिबंध कब से और कितने समय के लिए लगाया जाएगा, इस पर फैसला नहीं हुआ है।


अभी सहमति से निपटाया जाता है मामला


रेलवे बोर्ड के अनुसार ट्रेन में सफर के दौरान सह यात्रियों द्वारा दुर्व्यवहार करने की शिकायतें अक्सर मिलती हैं। मामला ज्यादा बढ़ने पर आरपीएफ या जीआरपी द्वारा दोनों पक्षाें की सहमति से मामला निपटाया जाता है। अगर मामला नहीं निपटता है, तो एफआईआर दर्ज होती है। पर दुर्व्यवहार करने वाले यात्री को सफर करने से रोका नहीं जाता है। हाल ही में चार एयरलाइंस द्वारा कॉमेडियन कुणाल कामरा पर प्रतिबंध लगाने के बाद रेलवे भी हरकत में आ गया है।


नो ट्रेवल लिस्ट में डाले जा सकते हैं नाम


रेलवे दुर्व्यवहार करने वाले व्यक्ति का नाम, पता, जन्म तारीख और पहचान-पत्र नंबर आदि आईआरसीटीसी को भेज सकता है। साथ ही रेलवे के सिस्टम में (विंडो टिकट) दर्ज कराकर नो ट्रेवल लिस्ट में डलवा सकता है। जब संबंधित व्यक्ति रिजर्वेशन के लिए विंडो पर जाएगा या आईआरसीटीसी की साइट पर जाएगा, तो उसका रिजर्वेशन नहीं होगा। चूंकि फ्लाइट में टिकट बुक कराते समय एक आईडी नंबर देना अनिवार्य है, लेकिन ट्रेनों में रिजर्वेशन कराते समय केवल नाम और उम्र लिखी जाती है, इस तरह एक ही नाम और उम्र के तमाम लोग हो सकते हैं। इन्हीं बाधाओं को देखते हुए रेलवे एक नया मॉडल तैयार कर रहा है।


बेंगलुरू स्टेशन पर अगले महीने से फेशियल रिकग्निशन सिस्टम


रेलवे अपराधों पर रोक लगाने के लिए फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू करने जा रहा है। बेंगलुरू स्टेशन पर फरवरी से इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया जाएगा। इसकी मदद से अपराधियों की पहचान आसान हो जाएगी। इस तकनीक से अपराधियों के चेहरे की मैपिंग की जाएगी। इसके बाद उनकी फोटो क्लिक करते ही देश के हर स्टेशन पर पहुंच जाएगी। इसके लिए वीडियो सर्विलांस प्रणाली लगाई जा रही है।