जयपुर: 2017 में सूचना मांगी, 2020 तक नहीं दी गई है

जिस आरटीआई कानून को लाने का श्रेय कांग्रेस बार बार लेती है, उसी की सरकार में इसकी पूछ नहीं हो रही है। मामला अजमेर की एक महिला आईएएस से जुड़ा हुआ है। इस आईएएस अधिकारी ने सूचना आयोग द्वारा 7 बार लिखे पत्रों का जवाब तक नही दिया। इसके बाद आयोग ने दो महीने पहले कार्मिक विभाग को इसकी शिकायत कर निर्देशित किया कि संबधित आईएएस के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए और तनख्वाह से 10 हजार रुपए जुर्माने के काटे जाए।। लेकिन कार्मिक विभाग ने आयोग के इस पत्र को फाईलों मे ही दफन कर दिया। वही आयोग ने इसी के साथ सूचना मांगने आए परिवादी यह कहते हुए को फैसला दिया की वे परिवाद में सूचना उपलब्ध नही करा सकते। 


परिवादी ने मई 2017 में नगर निगम अजमेर से सूचना मांगी, नहीं मिलने प्रथम अपील की गई। फिर द्वितीय अपील की। इस पर भी सूचना नहीं दी तो आयोग ने आईएएस पर 10 हजार रुपए का हर्जाना लगाया और 21 दिन में निशुल्क सूचना देने का आदेश दिया। आदेश की पालना नहीं करने पर आयोग ने नगर निगम अजमेर के आयुक्त आईएएस ऑफिसर चिन्मयी गोपाल को 14 दिसंबर 2018 से 15 जनवरी 2020 तक 7 बार पत्र लिखे की सूचना क्यों नहीं उपलब्ध कराई जा रही? आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त आशुतोष शर्मा ने अजमेर के कुन्दन नगर, मदार टेकरी निवासी उमर मौहम्मद के परिवाद पर फैसले देते हुए कहा कि आईएएस अधिकारी आरटीआई की पालन के प्रति गंभीर लापरवाही, अकर्मण्यता, उदासीनता के लिए दोषी हैं।